"सूखे होंठों की रेखाओं में, इंतज़ार के साल बुने होंगे...
हमको रेखाएं पढ़नी कहाँ आती है।"
"कोई मिल गया किसी को, इस में कौनसी नई बात है!
बात यही पुरानी हो जाती है..."