Tuesday, August 29, 2017

अतीत - भावी


खत

"मैं जो हर रोज़ कुछ न कुछ लिखती रहती हूँ यहां,
तुम समझते हो तुम्हे लिखा, वो सोचता है उसको;
कौन कहता है खत लिखने का ज़माना नहीं रहा..."
-Manali_Aaina

Monday, April 17, 2017

रिश्तों के मज़हब

Rishton ke bhi mazhab hote hain,
khatam ho jane ke baad pata chala.
Kuch jal gaye aur kuch dafn huye..
रिश्तों के भी मज़हब होते हैं,
ख़तम हो जाने के बाद पता चला...
कुछ जल गए और कुछ दफन हुए...

Monday, March 27, 2017

Chamatkar ya mohabbat

किसी और युग का दिल ले कर किसी और समय में जीती हूँ,
मेरी रूह के ज़माने का इश्क़ किसी और सदी में खो गया है...
मिल जाये तो लोग उसे चमत्कार कहेंगे...और हम मोहब्बत...

kisi aur yug ka dil le kar kisi aur samay mein jeeti hoon.
meri ruh ke zamane ka ishq kisi aur sadi mein kho gaya hai...
Mil jaye to log use chamatkar kahenge, aur hum mohabbat...

Monday, February 1, 2016

इंतज़ार 2

इंतज़ार लगा था मुसकुराती हुई झुर्रियों में,
पहली मुलाक़ात की ख़ुशी,आंसू न रुके।

बात न कह पाने की बात ही कुछ और है...

Sunday, January 31, 2016

इंतज़ार

इंतज़ार की शिकन मुसकुरा उठी,
धुंदली नज़र के आस पास कहीं।

होना ही था, पहली मुलाक़ात थी...

Thursday, December 31, 2015

Chehra

चेहरा देख कर रूह पहचान ले जो इंसान,
उनको भी न मालूम के कैसी पहेली हूँ ...
हमेशा मैं खुद की तरह जो नहीं दिखती...